Harshit
Sunday, 17 May 2020
किरण
तुम आभासी किरणों सी,
चंचल हिरणों सी लगती हो।
तुम दरिया की मोती सी,
कंचन स्वर्णो सी लगती हो।
तप मेरे जीवन भर का तुम,
अंतिम छण में चली आओ।
मैं क ख ग की परिभाषा,
तुम सब वर्णों सी लगती हो।
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